Crypto Tax in India: 30% टैक्स, 1% TDS और नया Penalty System — हर Investor को यह जानना जरूरी है

अगर आप भारत में Crypto में निवेश करते हैं या Trading करते हैं तो एक बात बिल्कुल साफ है — आपकी हर कमाई पर सरकार की नजर है। Crypto Tax in India अब एक बहुत सख्त और साफ नियम बन चुका है। गलती से भी Reporting न करने पर भारी जुर्माना और यहाँ तक कि जेल तक हो सकती है।

बहुत से लोग सोचते हैं कि Crypto की कमाई छुपाई जा सकती है लेकिन अब ऐसा नहीं है। सरकार Crypto Exchanges से सीधे आपके लेनदेन की जानकारी लेती है और ITR में उसे Match करती है। इस आर्टिकल में पूरी जानकारी मिलेगी कि Crypto पर कितना टैक्स लगता है, कौन से नियम बदले हैं, ITR में कैसे Report करें और क्या गलतियाँ आपको मुसीबत में डाल सकती हैं।

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Crypto Tax in India — बुनियादी नियम क्या हैं

30% Flat Tax

भारत में Crypto या किसी भी Virtual Digital Asset यानी VDA की बिक्री पर Section 115BBH के तहत 30% का Flat Tax लगता है। यह टैक्स चाहे आपने 1 दिन में बेचा हो या 1 साल बाद — दोनों पर बराबर लगता है। Short-Term और Long-Term का कोई फर्क नहीं।

इस 30% के ऊपर 4% का Health and Education Cess भी जुड़ता है जिससे असली टैक्स 31.2% हो जाता है।

₹12 लाख की छूट Crypto पर लागू नहीं

बहुत से लोग सोचते हैं कि नए Tax Regime में ₹12 लाख तक की कमाई पर कोई टैक्स नहीं है तो Crypto पर भी यही नियम होगा। यह गलत है। Crypto की कमाई पर ₹500 का प्रॉफिट हो तो भी उस पर 30% टैक्स देना ही पड़ेगा। Section 87A का Rebate भी Crypto Income पर नहीं मिलता।

सिर्फ खरीद की कीमत घटा सकते हैं

Crypto पर टैक्स निकालते वक्त केवल खरीद मूल्य यानी Cost of Acquisition घटाया जा सकता है। Exchange Fees, Gas Fees, Wallet Charges या कोई अन्य खर्च टैक्स से नहीं घटेगा।


1% TDS — यह क्या है और कब कटता है

TDS कब लागू होता है

Section 194S के तहत हर Crypto Transaction पर 1% TDS कटता है। यह TDS Exchange खुद काटकर सरकार को जमा करता है। यह TDS आपकी Tax Liability से घट जाता है लेकिन ITR में Report करना फिर भी जरूरी है।

P2P और विदेशी Exchange पर ध्यान दें

अगर आप किसी विदेशी Exchange जैसे Binance या Bybit पर Trading करते हैं या P2P से Crypto खरीदते हैं तो TDS काटने की जिम्मेदारी खरीदार यानी Buyer की होती है। अगर TDS नहीं काटा गया तो Seller और Buyer दोनों पर Penalty लग सकती है।


Crypto Loss पर क्या नियम है

नुकसान को Set Off नहीं कर सकते

यह Crypto Tax का सबसे बड़ा नुकसान है। अगर आपने Bitcoin में फायदा कमाया और Ethereum में नुकसान हुआ तो दोनों को एक साथ नहीं जोड़ा जा सकता। Bitcoin का Tax पूरा देना होगा चाहे Ethereum में कितना भी नुकसान हुआ हो।

इसके अलावा Crypto Loss को आगे के साल के लिए Carry Forward भी नहीं किया जा सकता और इसे किसी अन्य आय जैसे Salary या Business से भी Set Off नहीं किया जा सकता।


अलग-अलग तरह की Crypto Income पर टैक्स

Trading और Investment

किसी भी Crypto को बेचने, Swap करने या किसी चीज की खरीद में Use करने पर 30% Tax लगता है।

Airdrop और Gift में मिला Crypto

अगर आपको Airdrop या Gift में Crypto मिला है तो जब मिला उस समय उसकी जो बाजार कीमत थी वह “Income from Other Sources” मानी जाएगी और आपके Income Slab Rate के अनुसार टैक्स लगेगा। लेकिन जब आप उसे बेचेंगे तब 30% Tax फिर से लगेगा।

Mining से कमाई

Mining को Business Income के रूप में रिपोर्ट किया जा सकता है। Electricity और Equipment का खर्च घटाकर Net Profit पर Tax देना होता है। लेकिन जब Mined Crypto बेचेंगे तब VDA के नियम के तहत 30% Tax लगेगा।

Crypto Salary

अगर आप Salary Crypto में लेते हैं तो वह Salary Income मानी जाएगी और Slab Rate से टैक्स लगेगा। बाद में उसे बेचने पर VDA Rules लागू होंगे।

Crypto Futures और Options

अगर आप सिर्फ Contract Trade करते हैं जैसे Delta Exchange पर तो उस पर 30% Tax नहीं लगता। उसे Business Income माना जाता है और अगर Net Profit ₹12 लाख से कम है तो कोई टैक्स नहीं। यह एकमात्र तरीका है जहाँ Crypto Income पर Normal Slab Rate लागू होती है।


नया Compliance और Penalty Framework

Reporting अब बहुत सख्त हो गई है

अब Crypto Exchanges को हर User के Buy, Sell, Quantity और Value की पूरी जानकारी सरकार को देनी होती है। यह जानकारी आपके AIS यानी Annual Information Statement और TIS में दिखती है। ITR में जो आप भरते हैं वह इससे Match होता है।

Section 285BA और 509 के तहत Penalty

अगर कोई Exchange या Reporting Entity गलत या देरी से जानकारी देती है तो ₹200 प्रति दिन की Penalty लगती है जिसकी अधिकतम सीमा ₹1 लाख है।

Investor के लिए खतरा

अगर आपकी ITR में Crypto की कमाई नहीं दिखाई और सरकार के पास Exchange का डेटा है तो Mismatch Notice आएगा। गंभीर मामलों में Tax का 50% से 200% तक जुर्माना लग सकता है और 7 साल तक की जेल भी हो सकती है।

अगर Tax Raid में Crypto मिला और पहले Declare नहीं किया था तो 60% का Tax अलग से लगता है।


ITR में Crypto कैसे Report करें

कौन सा ITR Form भरें

अगर आपकी Crypto Income Capital Gain की तरह है यानी आप Investor हैं तो ITR-2 भरें। अगर आप Crypto Trading को Business की तरह करते हैं तो ITR-3 भरें।

Schedule VDA क्या है

ITR में एक अलग Section होता है जिसे Schedule VDA यानी Virtual Digital Assets कहते हैं। यहाँ हर Transaction की 6 जानकारियाँ देनी होती हैं जो इस प्रकार हैं।

पहली — खरीद की तारीख। दूसरी — बिक्री की तारीख। तीसरी — Income किस Head के अंतर्गत है। चौथी — खरीद मूल्य यानी Cost of Acquisition। पाँचवीं — बिक्री मूल्य। छठी — Net Profit या Loss।

TDS की जानकारी अलग से दें

Form 26AS और AIS में आपका कटा हुआ TDS दिखता है। उसे ITR के TDS Schedule में जरूर Report करें ताकि वह Tax Liability से घट जाए।

विदेशी Exchange का भी खुलासा जरूरी

अगर आपने किसी विदेशी Exchange पर Crypto रखी है तो Schedule FA में उसका पूरा विवरण देना जरूरी है। इसे छुपाने पर FEMA के तहत अलग से कार्रवाई हो सकती है।


यह गलतियाँ बिल्कुल न करें

Crypto Income छुपाना

Exchange आपकी पूरी Trading History सरकार को देते हैं। छुपाना मतलब Notice और Penalty पक्की।

सिर्फ Net Profit Report करना

हर Transaction की अलग-अलग जानकारी Schedule VDA में देनी होती है। सिर्फ कुल जोड़ काफी नहीं है।

Loss को Set Off करने की कोशिश

यह कानूनन मान्य नहीं है। अगर आपने ऐसा किया तो ITR Defective मानी जा सकती है।

विदेशी Exchange को Tax-Free समझना

विदेशी Platform पर Trading करने पर भी Indian Tax Law लागू होती है। TDS की जिम्मेदारी खुद उठानी होगी।


निष्कर्ष

Crypto Tax in India अब कोई भूल सकने वाली चीज नहीं रही। 30% Flat Tax, 1% TDS, लोस का Set Off न होना और सख्त Reporting — ये सब मिलकर Crypto को एक बहुत Disciplined Investment बना देते हैं। जितनी जल्दी आप इन नियमों को समझेंगे और सही तरीके से ITR में Report करेंगे उतना ही आप Notice और Penalty से बचे रहेंगे। हर Transaction का Record रखें, Schedule VDA सही भरें और समय पर ITR File करें।

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