मध्यावधि चुनाव किसे कहते हैं: अक्सर आप न्यूज़ में सुनते होंगे कि फलाने राज्य में या देश में मध्यावधि चुनाव हो सकते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह मध्यावधि चुनाव होता क्या है और इसकी जरूरत क्यों पड़ती है? अगर नहीं, तो चिंता की कोई बात नहीं। आज हम आपको बिल्कुल सरल भाषा में समझाएंगे कि मध्यावधि चुनाव क्या होता है, कब होता है और इसके क्या कारण होते हैं। यह जानकारी हर नागरिक के लिए जानना जरूरी है।
मध्यावधि चुनाव की परिभाषा
मध्यावधि चुनाव का मतलब है समय से पहले होने वाला चुनाव। जब कोई सरकार अपना पूरा 5 साल का कार्यकाल पूरा करने से पहले ही गिर जाती है या भंग हो जाती है, तब नई सरकार बनाने के लिए फिर से चुनाव कराए जाते हैं। इसे ही मध्यावधि चुनाव कहते हैं। सामान्य तौर पर लोकसभा और विधानसभा दोनों का कार्यकाल 5 साल का होता है, लेकिन अगर बीच में ही सरकार गिर जाए तो 5 साल पूरे होने का इंतजार नहीं किया जाता।
कब होता है मध्यावधि चुनाव
मध्यावधि चुनाव तब होता है जब सरकार अपना बहुमत खो देती है और विपक्ष भी सरकार बनाने में असमर्थ रहता है। कई बार गठबंधन की सरकारें बीच में टूट जाती हैं और कोई भी पार्टी बहुमत साबित नहीं कर पाती। ऐसी स्थिति में राष्ट्रपति या राज्यपाल सदन को भंग कर देते हैं और नए चुनाव की घोषणा होती है। यह देश या राज्य दोनों स्तर पर हो सकता है। कभी-कभी सरकार खुद भी समय से पहले चुनाव की सिफारिश कर देती है।
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क्या होते हैं मध्यावधि चुनाव के कारण
मध्यावधि चुनाव के कई कारण हो सकते हैं। सबसे आम कारण है सरकार का बहुमत खो देना। जब गठबंधन में शामिल पार्टियां समर्थन वापस ले लेती हैं तो सरकार गिर जाती है। कभी-कभी विधायकों या सांसदों का दल-बदल भी सरकार गिराने का कारण बनता है। किसी बड़े मुद्दे पर अविश्वास प्रस्ताव पास हो जाना भी मध्यावधि चुनाव की वजह बन सकता है। कुछ मामलों में सत्तारूढ़ पार्टी खुद ही अपनी मजबूत स्थिति के कारण जल्दी चुनाव कराना चाहती है।
भारत में कब-कब हुए मध्यावधि चुनाव
भारत में कई बार मध्यावधि चुनाव हो चुके हैं। 1977, 1979, 1980, 1991, 1998 और 1999 में देश में मध्यावधि लोकसभा चुनाव हुए थे। इन सभी में सरकारें बहुमत खो बैठी थीं या गठबंधन टूट गए थे। राज्यों में तो यह और भी ज्यादा बार होता है जब किसी मुख्यमंत्री की सरकार बहुमत नहीं साबित कर पाती। ये चुनाव आम चुनावों की तरह ही होते हैं लेकिन समय से पहले आयोजित किए जाते हैं।
मध्यावधि चुनाव के फायदे और नुकसान
मध्यावधि चुनाव का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अस्थिर सरकार की जगह नई और मजबूत सरकार आ सकती है। जनता को फिर से अपना मत देने का मौका मिलता है। लेकिन इसके नुकसान भी हैं। सरकारी खजाने पर हजारों करोड़ रुपये का बोझ पड़ता है क्योंकि चुनाव कराना बहुत महंगा होता है। विकास के काम रुक जाते हैं और देश या राज्य में अनिश्चितता का माहौल बन जाता है। बार-बार चुनाव होने से प्रशासन भी प्रभावित होता है।
Disclaimer: यह लेख सामान्य शैक्षिक जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। मध्यावधि चुनाव से जुड़े संवैधानिक और कानूनी पहलू गहन विषय हैं। अधिक विस्तृत जानकारी के लिए भारत के संविधान और चुनाव आयोग के नियमों का अध्ययन करें।






