Deendayal Antyodaya Yojana: ग्रामीण भारत में गरीबी से मुक्ति का सफर

Deendayal Antyodaya Yojana (DAY) भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है जो गरीबों को सशक्त बनाने और उनके जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए बनाई गई है। यह योजना मुख्य रूप से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में गरीबी को कम करने पर फोकस करती है। इसका नाम पंडित दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर रखा गया है, जो गरीबों के उत्थान के लिए समर्पित थे। इस योजना के तहत गरीब परिवारों को कौशल प्रशिक्षण, स्वरोजगार के अवसर और आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।

यह योजना 2011 में शुरू हुई National Rural Livelihood Mission (NRLM) और National Urban Livelihood Mission (NULM) को मिलाकर बनाई गई है। इसका मुख्य उद्देश्य गरीबों को आत्मनिर्भर बनाना है ताकि वे अपनी कमाई खुद कर सकें और गरीबी की जंजीरों से मुक्त हो सकें। योजना के जरिए लाखों लोग लाभान्वित हो चुके हैं, खासकर महिलाएं और युवा। अगर आप गरीबी से लड़ने वाली योजनाओं के बारे में जानना चाहते हैं, तो यह पोस्ट आपके लिए है। यहां हम सरल भाषा में सब कुछ समझाएंगे।

योजना की शुरुआत 2014-15 में हुई, जब सरकार ने इसे एकीकृत रूप दिया। पहले यह अलग-अलग कार्यक्रमों के रूप में चल रही थी, लेकिन अब यह एक छतरी योजना के रूप में काम करती है। ग्रामीण क्षेत्रों में इसे DAY-NRLM और शहरी क्षेत्रों में DAY-NULM के नाम से जाना जाता है। सरकार का लक्ष्य है कि 2025 तक करोड़ों परिवारों को गरीबी रेखा से ऊपर लाया जाए।

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Deendayal Antyodaya Yojana – Features and Objectives

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Deendayal Antyodaya Yojana के मुख्य उद्देश्य

इस योजना के उद्देश्य बहुत स्पष्ट हैं। सबसे पहले, यह गरीब परिवारों को कौशल आधारित रोजगार प्रदान करना चाहती है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को स्वयं सहायता समूह (SHG) में संगठित किया जाता है, जहां वे बचत करना, लोन लेना और छोटे व्यवसाय शुरू करना सीखती हैं। शहरी क्षेत्रों में स्ट्रीट वेंडर्स और बेघर लोगों को सहायता दी जाती है।

दूसरा उद्देश्य है गरीबी को बहुआयामी तरीके से कम करना। मतलब सिर्फ पैसे नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास और सामाजिक सुरक्षा भी। योजना के तहत गरीबों को बैंक लोन पर ब्याज सब्सिडी मिलती है, जिससे वे अपना बिजनेस शुरू कर सकें। तीसरा, यह योजना विशेष रूप से महिलाओं, युवाओं और कमजोर वर्गों पर फोकस करती है। उदाहरण के लिए, ग्रामीण क्षेत्रों में कम से कम एक महिला सदस्य को SHG से जोड़ा जाता है।

इसके अलावा, योजना का लक्ष्य है कि गरीबों को बाजार से जोड़ना। वे जो उत्पाद बनाते हैं, उन्हें बेचने के लिए मार्केटिंग सपोर्ट दिया जाता है। जैसे कि SARAS मेलों का आयोजन, जहां SHG के उत्पाद बेचे जाते हैं। कुल मिलाकर, उद्देश्य है गरीबों को सशक्त बनाकर देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना।

योजना के उद्देश्यों को हासिल करने के लिए सरकार ने कई साझेदारियां की हैं, जैसे ई-कॉमर्स कंपनियों के साथ। इससे SHG के सदस्य अपने उत्पाद ऑनलाइन बेच सकते हैं। यह सब गरीबों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाता है।

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योजना के मुख्य घटक: NRLM और NULM

Deendayal Antyodaya Yojana दो मुख्य भागों में बंटी है: National Rural Livelihood Mission (NRLM) और National Urban Livelihood Mission (NULM)। NRLM ग्रामीण क्षेत्रों पर फोकस करता है, जबकि NULM शहरों में काम करता है।

NRLM के तहत ग्रामीण गरीबों को SHG में संगठित किया जाता है। ये समूह बचत करते हैं और बैंक से लोन लेते हैं। सरकार Revolving Fund और Community Investment Fund प्रदान करती है। इससे SHG मजबूत होते हैं और सदस्य छोटे उद्योग शुरू कर सकते हैं, जैसे पशुपालन, कृषि या हस्तकला।

NULM में शहरी गरीबों के लिए कौशल प्रशिक्षण, माइक्रो-एंटरप्राइज लोन और स्ट्रीट वेंडर्स के लिए स्पेस उपलब्ध कराया जाता है। योजना के तहत City Livelihood Centers बनाए जाते हैं, जहां ट्रेनिंग दी जाती है। इसके अलावा, बेघरों के लिए शेल्टर और बेसिक सर्विसेज प्रदान की जाती हैं।

एक और महत्वपूर्ण घटक है Start-up Village Entrepreneurship Programme (SVEP), जो ग्रामीण युवाओं को उद्यमिता सिखाता है। इसमें बिजनेस प्लानिंग, फाइनेंशियल मैनेजमेंट और मार्केटिंग की ट्रेनिंग मिलती है। कुल मिलाकर, ये घटक योजना को मजबूत बनाते हैं।

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ग्रामीण क्षेत्रों में DAY-NRLM का कार्यान्वयन

ग्रामीण भारत में गरीबी एक बड़ी समस्या है, और DAY-NRLM इसे दूर करने के लिए काम करता है। योजना की शुरुआत से अब तक 10 करोड़ से ज्यादा परिवार जुड़ चुके हैं, और 90 लाख से अधिक SHG बनाए गए हैं। ये SHG मुख्य रूप से महिलाओं के हैं, जो उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाते हैं।

कार्यान्वयन का तरीका चरणबद्ध है। पहले गरीब परिवारों की पहचान की जाती है, Participatory Identification of Poor (PIP) के जरिए। फिर उन्हें SHG में शामिल किया जाता है। प्रत्येक SHG को 10-15 हजार रुपए का Revolving Fund मिलता है, जो घूम-फिर कर इस्तेमाल होता है।

कृषि और पशुपालन में सुधार के लिए Krishi Sakhi और Pashu Sakhi जैसी कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन ट्रेन की जाती हैं। ये महिलाएं गांव में ही सर्विस देती हैं, जैसे फसल की सलाह या जानवरों की देखभाल। इससे आय बढ़ती है और गांव आत्मनिर्भर बनता है।

बैंक लिंकेज बहुत महत्वपूर्ण है। SHG को बिना गारंटी लोन मिलता है, और ब्याज पर सब्सिडी भी। 2013 से अब तक 11 लाख करोड़ से ज्यादा क्रेडिट दिया गया है, और रीपेमेंट रेट 98% से ऊपर है। इससे बैंक भी SHG पर भरोसा करते हैं।

योजना में कौशल विकास के लिए Deen Dayal Upadhyaya Grameen Kaushalya Yojana (DDU-GKY) है, जो युवाओं को ट्रेनिंग देती है। 17 लाख से ज्यादा युवा ट्रेन हो चुके हैं, और 11 लाख को जॉब मिली है। Rural Self Employment Training Institutes (RSETI) भी उद्यमिता सिखाते हैं।

असम जैसे राज्यों में योजना का विस्तार तेजी से हुआ है। वहां 219 ब्लॉक्स में Block Mission Management Units बने हैं, और SHG को फाइनेंशियल सपोर्ट मिल रहा है। सफलता की दर ऊंची है, क्योंकि योजना लोकल जरूरतों के अनुसार चलाई जाती है।

Skill Development Training in Rural India - Stride towards Growing

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शहरी क्षेत्रों में DAY-NULM का कार्यान्वयन

शहरों में गरीबी अलग रूप में है, जैसे स्ट्रीट वेंडर्स, बेघर और अनस्किल्ड वर्कर्स। DAY-NULM इनकी मदद करता है। योजना के तहत कौशल ट्रेनिंग दी जाती है, ताकि वे अच्छी नौकरी पा सकें या अपना बिजनेस शुरू करें।

कार्यान्वयन में Social Mobilization and Institution Development (SMID) महत्वपूर्ण है। इससे SHG बनाए जाते हैं, और सदस्यों को ट्रेनिंग मिलती है। Employment through Skills Training & Placement (EST&P) के तहत मार्केट-ओरिएंटेड कोर्स चलाए जाते हैं।

स्ट्रीट वेंडर्स के लिए Support to Urban Street Vendors (SUSV) है, जिसमें स्पेस, क्रेडिट और सोशल सिक्योरिटी मिलती है। PM SVANidhi जैसी स्कीम से लोन दिए जाते हैं। बेघरों के लिए Shelter for Urban Homeless (SUH) में शेल्टर बनाए जाते हैं, जहां बेसिक फैसिलिटी होती है।

योजना में कन्वर्जेंस पर जोर है, जैसे Swachh Bharat Mission या PMFME के साथ। इससे गरीबों को ज्यादा फायदा मिलता है। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म जैसे Amazon और Flipkart के साथ MoU से उत्पाद बेचने में मदद मिलती है।

शहरी क्षेत्रों में 4.5 लाख से ज्यादा लोगों को ट्रेनिंग दी गई है, और 1 लाख को जॉब मिली है। लोन से 70 हजार से ज्यादा माइक्रो-एंटरप्राइज शुरू हुए हैं। यह सब शहरों में गरीबी कम करने में मदद करता है।

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Deendayal Antyodaya Yojana के लाभ और फायदे

इस योजना के कई फायदे हैं। सबसे बड़ा लाभ है आर्थिक सशक्तिकरण। SHG के जरिए महिलाएं स्वतंत्र हो रही हैं, और उनकी आय बढ़ रही है। उदाहरण के लिए, ग्रामीण क्षेत्रों में महिला किसान Agro-Ecological Practices अपनाकर ज्यादा उत्पादन कर रही हैं।

दूसरा फायदा है सामाजिक बदलाव। योजना से घरेलू हिंसा, लिंग भेदभाव और स्वास्थ्य मुद्दों पर जागरूकता बढ़ती है। गरीब परिवार शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच पाते हैं।

तीसरा, रोजगार सृजन। ट्रेनिंग से युवा स्किल्ड हो जाते हैं, और जॉब मार्केट में एंट्री मिलती है। उद्यमिता से नए बिजनेस शुरू होते हैं, जो लोकल इकोनॉमी को बूस्ट देते हैं।

चौथा, वित्तीय समावेशन। SHG बैंक से जुड़ते हैं, और क्रेडिट हिस्ट्री बनती है। इससे आगे बड़े लोन मिल सकते हैं। कुल मिलाकर, योजना गरीबी को जड़ से खत्म करने में मदद करती है।

राज्यों में सफलता अलग-अलग है। जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार और आंध्र प्रदेश में SHG की संख्या सबसे ज्यादा है। वहां कैपिटलाइजेशन और बैंक लोन में टारगेट से ज्यादा हासिल किया गया है।

Officials of Deendayal Antyodaya Yojana Review Implementation of ...

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योजना की सफलता की कहानियां

एक सफलता की कहानी मेघालय की हेनीदामांकी कनाई की है। वे 2020 में SHG से जुड़ीं और NRLM की मदद से साबुन बनाने का बिजनेस शुरू किया। 1.8 लाख का लोन लेकर मशीनरी खरीदी और अब सालाना 1 लाख से ज्यादा कमाती हैं। वे दूसरी महिलाओं को भी ट्रेन करती हैं।

एक और उदाहरण ग्रामीण युवाओं का है, जो DDU-GKY से ट्रेन होकर अच्छी नौकरियां पा रहे हैं। ओडिशा और आंध्र प्रदेश में लाखों युवा प्लेस्ड हो चुके हैं।

शहरी क्षेत्र में स्ट्रीट वेंडर्स PM SVANidhi से लोन लेकर अपना काम बढ़ा रहे हैं। ये कहानियां दिखाती हैं कि योजना वास्तव में बदलाव ला रही है।

चुनौतियां और भविष्य की दिशा

योजना में चुनौतियां भी हैं, जैसे लोकल लेवल पर जागरूकता की कमी या फंड का सही इस्तेमाल। लेकिन सरकार लगातार सुधार कर रही है, जैसे MIS टूल्स और ट्रेनिंग वर्कशॉप से।

भविष्य में योजना को और विस्तार दिया जाएगा, जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ना। लक्ष्य है कि 2025 तक और ज्यादा परिवार लाभान्वित हों। यह योजना भारत को गरीबी मुक्त बनाने में बड़ी भूमिका निभाएगी।

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