Jal Jeevan Mission: ग्रामीण भारत में पेयजल की क्रांति

जल जीवन मिशन भारत की एक महत्वाकांक्षी योजना है जो ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य रखती है। यह योजना न केवल पानी की उपलब्धता बढ़ाती है बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और महिलाओं के सशक्तिकरण में भी योगदान देती है। आज के समय में जब जल संकट वैश्विक समस्या बन चुका है, तब जल जीवन मिशन जैसे प्रयास ग्रामीण जीवन को बदल रहे हैं। इस योजना के तहत नल से जल की सुविधा हर घर तक पहुंचाई जा रही है, जिससे लाखों परिवारों का जीवन आसान हो रहा है। आइए जानते हैं इस मिशन के बारे में विस्तार से, सरल भाषा में।

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जल जीवन मिशन का इतिहास और पृष्ठभूमि

जल जीवन मिशन की शुरुआत 2019 में हुई, जब भारत सरकार ने ग्रामीण पेयजल कार्यक्रमों को एक नए रूप में पुनर्गठित किया। पहले ग्रामीण इलाकों में पानी की आपूर्ति के लिए कई योजनाएं चल रही थीं, लेकिन वे पर्याप्त नहीं थीं। उस समय केवल करीब 17 प्रतिशत ग्रामीण घरों में नल से पानी की सुविधा उपलब्ध थी। सरकार ने इस समस्या को देखते हुए एक व्यापक योजना शुरू की, जिसका मुख्य फोकस हर घर में नल कनेक्शन प्रदान करना था। यह मिशन स्वतंत्रता दिवस के मौके पर घोषित किया गया और इसका लक्ष्य 2024 तक पूरा करने का था, हालांकि अब इसे 2028 तक बढ़ाया गया है। इस योजना ने ग्रामीण विकास को नई दिशा दी है, जहां पानी की कमी से जूझते गांवों में अब बदलाव दिख रहा है।

इस मिशन की पृष्ठभूमि में जल संरक्षण की पुरानी परंपराएं भी शामिल हैं। भारत में सदियों से वर्षा जल संचयन और कुओं का उपयोग होता रहा है, लेकिन आधुनिक समय में जनसंख्या वृद्धि और जल प्रदूषण ने चुनौतियां बढ़ा दीं। जल जीवन मिशन इन चुनौतियों का सामना करने के लिए बनाया गया है, जिसमें समुदाय की भागीदारी को प्रमुखता दी गई है। इससे न केवल पानी की उपलब्धता बढ़ी है बल्कि लोगों में जागरूकता भी आई है।

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जल जीवन मिशन के मुख्य उद्देश्य

इस मिशन का मुख्य उद्देश्य हर ग्रामीण परिवार को प्रति व्यक्ति प्रति दिन 55 लीटर सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना है। यह योजना ‘हर घर जल’ के सिद्धांत पर आधारित है, जहां नल कनेक्शन के माध्यम से पानी सीधे घर पहुंचता है। इसके अलावा, पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित करना, स्रोतों का संरक्षण और पुन: उपयोग पर जोर दिया जाता है। मिशन में ग्रे वाटर मैनेजमेंट, वर्षा जल संचयन और जल संरक्षण जैसी गतिविधियां शामिल हैं।

उद्देश्यों में विशेष रूप से सूखा प्रभावित क्षेत्रों, मरुस्थलीय इलाकों और गुणवत्ता से प्रभावित गांवों पर फोकस है। साथ ही, स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों और सार्वजनिक स्थानों पर भी नल की सुविधा प्रदान की जा रही है। यह योजना महिलाओं को सशक्त बनाती है, क्योंकि पानी लाने का बोझ कम होने से वे अन्य कार्यों में समय दे सकती हैं। कुल मिलाकर, जल जीवन मिशन स्वास्थ्य सुधार, आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण का एक संपूर्ण पैकेज है।

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कार्यान्वयन की प्रक्रिया और संरचना

जल जीवन मिशन का कार्यान्वयन केंद्र और राज्य सरकारों के सहयोग से होता है। राष्ट्रीय स्तर पर जल शक्ति मंत्रालय इसकी निगरानी करता है, जबकि राज्य स्तर पर राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन (एसडब्ल्यूएसएम) जिम्मेदारी संभालता है। जिला स्तर पर डिस्ट्रिक्ट वाटर एंड सेनिटेशन मिशन और गांव स्तर पर पानी समिति काम करती है। पानी समिति में ग्राम पंचायत के सदस्य शामिल होते हैं, जिसमें कम से कम 50 प्रतिशत महिलाएं होती हैं।

कार्यान्वयन में प्रौद्योगिकी का उपयोग प्रमुख है। रियल-टाइम डैशबोर्ड, आईओटी सेंसर और जियो-टैगिंग से प्रगति की निगरानी की जाती है। फंडिंग का पैटर्न अलग-अलग राज्यों के लिए अलग है – उत्तर-पूर्वी राज्यों में केंद्र का हिस्सा 90 प्रतिशत, जबकि अन्य राज्यों में 50 प्रतिशत। समुदाय से भी 10 प्रतिशत योगदान लिया जाता है, जो योजना की स्थिरता सुनिश्चित करता है। इसके अलावा, एमएनआरईजीए और अन्य योजनाओं से एकीकरण कर स्रोत संरक्षण के कार्य किए जाते हैं।

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प्रगति और उपलब्धियां

जनवरी 2026 तक, जल जीवन मिशन ने प्रभावशाली प्रगति दिखाई है। देश के लगभग 81.50 प्रतिशत ग्रामीण घरों में नल कनेक्शन पहुंच चुके हैं, जो कुल 19 करोड़ से अधिक घरों में से 15 करोड़ से ज्यादा है। मिशन की शुरुआत से अब तक 12 करोड़ से अधिक नए कनेक्शन दिए गए हैं। गोवा, हरियाणा, तेलंगाना, गुजरात, पंजाब जैसे 11 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश 100 प्रतिशत कवरेज हासिल कर चुके हैं।

उपलब्धियों में स्वास्थ्य लाभ प्रमुख है। सुरक्षित पानी से डायरिया जैसी बीमारियों में कमी आई है, जिससे लाखों मौतें रोकी जा सकी हैं। महिलाओं के लिए समय की बचत हुई है, जो अब कृषि और शिक्षा में उपयोग हो रहा है। इसके अलावा, 9 लाख से अधिक स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में पानी की सुविधा पहुंची है। जल गुणवत्ता परीक्षण के लिए 24 लाख महिलाओं को प्रशिक्षित किया गया है, जो समुदाय स्तर पर पानी की जांच करती हैं। यह मिशन रोजगार सृजन भी कर रहा है, जिसमें करोड़ों व्यक्ति-वर्ष के रोजगार उत्पन्न हुए हैं।

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समुदाय की भूमिका और क्षमता निर्माण

जल जीवन मिशन की सफलता में समुदाय की भागीदारी केंद्रीय है। गांवों में पानी समितियां बनाई जाती हैं, जो योजना की योजना बनाने, कार्यान्वयन और रखरखाव में शामिल होती हैं। महिलाओं को विशेष रूप से शामिल किया जाता है, जिससे वे निर्णय लेने की प्रक्रिया में सक्रिय हो रही हैं। क्षमता निर्माण के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाते हैं, जहां लोगों को जल संरक्षण, गुणवत्ता परीक्षण और रखरखाव सिखाया जाता है।

उदाहरण के लिए, कई गांवों में महिलाओं के समूह पानी की बिलिंग और मरम्मत का काम संभाल रहे हैं, जिससे वे आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं। जल बचाओ समितियां बनाई जा रही हैं, जो स्रोत संरक्षण पर काम करती हैं। यह जन आंदोलन बन चुका है, जहां लोग खुद पानी की महत्वता समझ रहे हैं और योगदान दे रहे हैं। ऐसे प्रयासों से योजना की दीर्घकालिक सफलता सुनिश्चित हो रही है।

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जल गुणवत्ता और निगरानी

सुरक्षित पानी सुनिश्चित करने के लिए जल जीवन मिशन में गुणवत्ता परीक्षण पर विशेष जोर है। हर गांव में फील्ड टेस्टिंग किट्स उपलब्ध कराई जाती हैं, जिनसे स्थानीय स्तर पर पानी की जांच की जा सकती है। लैबोरेटरी में भी लाखों सैंपल टेस्ट किए जा रहे हैं। प्रदूषित स्रोतों जैसे लोहा, नाइट्रेट या भारी धातुओं से प्रभावित इलाकों पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

निगरानी के लिए डिजिटल टूल्स जैसे मोबाइल ऐप और वेब एप्लीकेशन इस्तेमाल होते हैं, जहां रियल-टाइम डेटा अपडेट होता है। इससे पारदर्शिता बढ़ती है और समस्याओं का त्वरित समाधान होता है। महिलाओं को प्रशिक्षित कर गुणवत्ता जांच में शामिल करना एक अनोखी पहल है, जो स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत बनाती है।

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चुनौतियां और समाधान

जल जीवन मिशन में कई चुनौतियां हैं, जैसे राज्यवार असमान प्रगति। कुछ राज्यों जैसे राजस्थान, झारखंड और पश्चिम बंगाल में कवरेज 50-60 प्रतिशत के आसपास है, जबकि अन्य में 100 प्रतिशत। जल स्रोतों की कमी, प्रदूषण और रखरखाव की समस्या भी बाधा बनती है। इसके अलावा, डेटा की सटीकता और बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता में सुधार की जरूरत है।

समाधान के रूप में, सरकार थर्ड-पार्टी ऑडिट, जियो-टैगिंग और प्रदर्शन-आधारित फंडिंग पर जोर दे रही है। आपदा के लिए कंटिंजेंसी फंड और अन्य योजनाओं से एकीकरण कर स्रोत संरक्षण किया जा रहा है। जागरूकता अभियान और नियमित समीक्षा से इन चुनौतियों का सामना किया जा रहा है, ताकि मिशन अपने लक्ष्य तक पहुंच सके।

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सफल कहानियां और प्रभाव

जल जीवन मिशन की कई सफल कहानियां हैं। उदाहरण के लिए, महाराष्ट्र में महिलाओं के समूह ने पानी की बिलिंग से कमाई की और गांव को स्वावलंबी बनाया। नागालैंड में स्रोत संरक्षण से पानी की उपलब्धता बढ़ी, जबकि असम में स्वास्थ्य समस्याएं कम हुईं। राजस्थान में जल सुरक्षा योजनाओं से भंडारण क्षमता बढ़ी।

यह मिशन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा है, जहां पानी की बचत से कृषि उत्पादन बढ़ा है। बच्चे अब बीमारियों से दूर रहकर बेहतर शिक्षा ले रहे हैं। कुल मिलाकर, यह योजना भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में एक सकारात्मक बदलाव ला रही है।

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भविष्य की दिशा और सुझाव

भविष्य में जल जीवन मिशन को और मजबूत बनाने के लिए सस्टेनेबिलिटी पर फोकस जरूरी है। रखरखाव नीतियां, वित्तीय सुधार और प्रौद्योगिकी एकीकरण से लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। लोगों को और अधिक जागरूक बनाना चाहिए, ताकि पानी का सदुपयोग हो।

सुझाव के रूप में, हर व्यक्ति जल संरक्षण में योगदान दे सकता है। वर्षा जल संचयन, अपशिष्ट जल का पुन: उपयोग और पेड़ लगाना जैसे कदम उठाएं। जल जीवन मिशन न केवल एक योजना है बल्कि एक आंदोलन है, जो भारत को जल समृद्ध बनाएगा।

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इस पोस्ट में हमने जल जीवन मिशन के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। यह योजना ग्रामीण भारत के लिए वरदान साबित हो रही है, जहां पानी की पहुंच अब सपना नहीं बल्कि हकीकत बन रही है। यदि आप इस मिशन से जुड़ना चाहते हैं, तो स्थानीय पानी समिति में भाग लें और योगदान दें।

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