बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ (बीबीबीपी) योजना भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है जो बेटियों के जीवन को बेहतर बनाने पर केंद्रित है। यह योजना न केवल लिंग अनुपात में सुधार लाने का प्रयास करती है बल्कि बेटियों की शिक्षा, स्वास्थ्य और सशक्तिकरण को भी बढ़ावा देती है। आज के समय में जहां समाज में बेटियों के प्रति भेदभाव अभी भी मौजूद है, वहां यह योजना एक उम्मीद की किरण की तरह काम कर रही है। इस पोस्ट में हम इस योजना के बारे में विस्तार से बात करेंगे, इसके उद्देश्यों, कार्यान्वयन, प्रभाव और सफलताओं पर। अगर आप बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के बारे में जानना चाहते हैं, तो यह पोस्ट आपके लिए उपयोगी होगी।
Beti Bachao, Beti Padhao Fails To Address The Stigma Against Girls
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना क्या है?
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, जिसे अंग्रेजी में Save the Girl Child, Educate the Girl Child कहा जाता है, भारत सरकार की एक राष्ट्रीय स्तर की योजना है। यह योजना बेटियों के जन्म को प्रोत्साहित करने, उनके अस्तित्व को सुरक्षित करने और उन्हें शिक्षा प्रदान करने पर जोर देती है। योजना का मुख्य फोकस लिंग-आधारित भेदभाव को खत्म करना है, जो अक्सर कन्या भ्रूण हत्या या लिंग चयन जैसे मुद्दों से जुड़ा होता है।
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यह योजना तीन मंत्रालयों – महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय – के संयुक्त प्रयास से चलाई जाती है। इसका मतलब है कि यह सिर्फ एक विभाग की योजना नहीं बल्कि एक बहु-क्षेत्रीय अभियान है जो स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक जागरूकता को एक साथ जोड़ता है। योजना की शुरुआत से अब तक लाखों बेटियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है, और यह समाज को बेटियों के महत्व को समझाने में सफल रही है।
योजना के तहत विभिन्न कार्यक्रम चलाए जाते हैं जैसे जागरूकता अभियान, सामुदायिक भागीदारी और वित्तीय सहायता। उदाहरण के लिए, सुकन्या समृद्धि योजना जैसी स्कीम्स को इससे जोड़ा गया है, जहां माता-पिता बेटी के नाम पर बचत खाता खोल सकते हैं और कर छूट का लाभ ले सकते हैं। यह योजना न केवल बेटियों को बचाने पर बल्कि उन्हें सशक्त बनाने पर भी ध्यान देती है।
योजना की शुरुआत और इतिहास
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना की शुरुआत 22 जनवरी 2015 को हरियाणा के पानीपत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई थी। हरियाणा को इसलिए चुना गया क्योंकि यहां लिंग अनुपात सबसे कम था। योजना की शुरुआत में 100 करोड़ रुपये का प्रारंभिक बजट रखा गया था, और इसे शुरू में 100 जिलों में लागू किया गया जहां बच्ची-बच्चे का अनुपात बहुत कम था।
समय के साथ योजना का विस्तार पूरे देश में हो गया। अब यह सभी जिलों में लागू है और विभिन्न राज्यों में स्थानीय स्तर पर अनुकूलित की गई है। उदाहरण के लिए, तमिलनाडु में इसे कुड्डालोर जिले में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया, जबकि मध्य प्रदेश और हरियाणा में विशेष अभियान चलाए गए। योजना ने सोशल मीडिया को भी प्रभावी तरीके से इस्तेमाल किया, जैसे #SelfieWithDaughter अभियान जो विश्व स्तर पर प्रसिद्ध हुआ। इस अभियान में लोगों ने अपनी बेटियों के साथ सेल्फी शेयर कीं, जिससे जागरूकता फैली।
योजना का इतिहास भारत में लिंग भेदभाव की समस्या से जुड़ा है। 2011 की जनगणना के अनुसार, 0-6 वर्ष की आयु में प्रति 1000 लड़कों पर लड़कियों की संख्या 918 थी, जो 2001 के 927 से कम थी। यह गिरावट चिंताजनक थी, और इसी को देखते हुए सरकार ने यह योजना लॉन्च की। अब तक योजना ने लाखों लोगों को प्रभावित किया है और लिंग अनुपात में सुधार दिखाया है।

योजना के मुख्य उद्देश्य
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के उद्देश्य बहुत स्पष्ट और व्यावहारिक हैं। सबसे पहला उद्देश्य है लिंग-आधारित सेक्स सिलेक्शन को रोकना। इसका मतलब है कि कन्या भ्रूण हत्या जैसी प्रथाओं पर रोक लगाना और बेटियों के जन्म को प्रोत्साहित करना। दूसरा, बेटियों की सुरक्षा और अस्तित्व सुनिश्चित करना, जिसमें स्वास्थ्य सेवाएं, पोषण और संरक्षण शामिल हैं। तीसरा, बेटियों की शिक्षा और भागीदारी को बढ़ावा देना ताकि वे समाज में बराबर का स्थान पा सकें।
योजना का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य समाज में मानसिकता बदलना है। यह ‘बेटा-बेटी एक समान’ का संदेश देती है। इसके अलावा, योजना महिलाओं के जीवन चक्र में सशक्तिकरण पर फोकस करती है, जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता। उदाहरण के लिए, योजना के तहत मासिक धर्म स्वच्छता पर जागरूकता फैलाई जाती है और स्कूलों में लड़कियों के लिए सुविधाएं बढ़ाई जाती हैं।
ये उद्देश्य न केवल बेटियों को लाभ पहुंचाते हैं बल्कि पूरे समाज को मजबूत बनाते हैं। जब बेटियां पढ़ती हैं और सशक्त होती हैं, तो परिवार और देश दोनों का विकास होता है। योजना के उद्देश्यों को हासिल करने के लिए विभिन्न स्तरों पर काम किया जाता है, जैसे जिला स्तर पर टास्क फोर्स गठित करना और सामुदायिक स्तर पर रैलियां आयोजित करना।
योजना के प्रमुख घटक
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना कई घटकों से बनी है जो इसे प्रभावी बनाते हैं। पहला घटक है जागरूकता अभियान। इसमें मीडिया, सोशल मीडिया, रेडियो और टीवी के माध्यम से संदेश फैलाए जाते हैं। उदाहरण के लिए, हरियाणा में ‘माहरी लाडो’ नामक रेडियो कार्यक्रम चलाया जाता है जो gender equality पर बात करता है।
दूसरा घटक है सामुदायिक भागीदारी। योजना में पंचायतों, स्कूलों और एनजीओ को शामिल किया जाता है। जैसे, ‘कुआं पूजन’ जहां बेटी के जन्म पर उत्सव मनाया जाता है, या ‘नन्हे चिन्ह’ जहां आंगनवाड़ी में बेटियों के पैरों के निशान दर्ज किए जाते हैं। तीसरा, कानूनी प्रवर्तन। पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत सेक्स डिटर्मिनेशन पर सख्ती की जाती है, और हजारों केस दर्ज किए गए हैं।
चौथा घटक है शिक्षा और स्वास्थ्य। स्कूलों में लड़कियों के लिए टॉयलेट, पानी और सेनिटरी नैपकिन वितरण किया जाता है। पंजाब में ‘उड़ान’ योजना के तहत लड़कियां प्रोफेशनल्स के साथ समय बिता सकती हैं। पांचवां, वित्तीय सहायता। सुकन्या समृद्धि योजना के तहत खाता खोलकर 8% ब्याज दर पर बचत की जा सकती है, और कर लाभ मिलता है।
ये घटक एक साथ मिलकर योजना को मजबूत बनाते हैं और विभिन्न राज्यों में अनुकूलित किए जाते हैं।
योजना का कार्यान्वयन कैसे होता है?
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना का कार्यान्वयन जिला स्तर पर होता है। हर जिले में एक टास्क फोर्स बनाई जाती है जिसके अध्यक्ष जिलाधिकारी होते हैं। योजना की शुरुआत में 100 जिलों को चुना गया था, लेकिन अब यह पूरे देश में फैल चुकी है। कार्यान्वयन में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, स्कूल टीचर्स और स्वास्थ्य कर्मी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उदाहरण के लिए, हरियाणा में ‘विद्या वाहिनी’ योजना के तहत लड़कियों को बस पास दिए जाते हैं ताकि वे स्कूल जा सकें। तमिलनाडु में स्कूलों में इंसीनरेटर लगाए गए हैं। मध्य प्रदेश में सर्वे और घर-घर जाकर जागरूकता फैलाई जाती है। योजना में एनजीओ और कॉरपोरेट की भागीदारी भी होती है, जैसे सीएसआर फंड से कार्यक्रम चलाए जाते हैं।
कार्यान्वयन में चुनौतियां भी हैं, जैसे फंड का सही उपयोग और कम्युनिटी की भागीदारी। लेकिन सरकार ने ट्रेनिंग प्रोग्राम्स और मॉनिटरिंग सिस्टम से इसे मजबूत किया है। राष्ट्रीय स्तर पर एक समिति योजना की निगरानी करती है।

Beti Bachao, Beti Padhao (BBBP) Scheme | IBEF
योजना का प्रभाव और उपलब्धियां
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है। लिंग अनुपात में सुधार हुआ है। उदाहरण के लिए, हरियाणा में जन्म के समय लिंग अनुपात 871 से बढ़कर 915 हो गया। संस्थागत प्रसव 35% से बढ़कर 95% हो गए, और एएनसी रजिस्ट्रेशन में 34% की वृद्धि हुई।
उपलब्धियों में #SelfieWithDaughter अभियान की विश्वव्यापी सफलता शामिल है। लाखों लोगों ने भाग लिया। शिक्षा में नामांकन बढ़ा, जैसे माध्यमिक स्तर पर 3.85 लाख से 4 लाख तक। कानूनी कार्रवाई में 1300 से ज्यादा एफआईआर दर्ज की गईं। रेडियो कार्यक्रमों से 2 लाख लोग जुड़े।
मध्य प्रदेश में सर्वे से पता चला कि 63% लोगों ने कहा कि योजना ने स्कूल एनरोलमेंट बढ़ाया। तमिलनाडु में ड्रॉपआउट रेट कम हुआ। कुल मिलाकर, योजना ने समाज की सोच बदली है और बेटियों को महत्व दिया है।
चुनौतियां और सुधार के सुझाव
हर योजना की तरह इसमें भी चुनौतियां हैं। फंड का बड़ा हिस्सा विज्ञापन पर खर्च होता है, जबकि जिलों को कम मिलता है। कुछ जिलों में लिंग अनुपात अभी भी गिर रहा है। पारंपरिक सोच बदलना मुश्किल है।
सुधार के लिए फंड का बेहतर वितरण, अधिक ट्रेनिंग और मॉनिटरिंग जरूरी है। कम्युनिटी को और जोड़ना चाहिए।
सफलता की कहानियां
कई बेटियां योजना से लाभान्वित हुईं। जैसे, खेल में साक्षी मलिक जैसी ब्रांड एंबेसडर बनीं। गांवों में बेटियों के जन्म पर उत्सव मनाए जाते हैं। एक गांव में सेल्फी अभियान से पूरी कम्युनिटी जुड़ी।
निष्कर्ष
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना भारत के भविष्य को बदल रही है। यह बेटियों को सशक्त बनाती है और समाज को मजबूत। अगर हम सब मिलकर इसमें योगदान दें, तो एक समान समाज बन सकता है। अधिक जानकारी के लिए सरकारी वेबसाइट्स देखें।








