Income Tax Changes 2026: 1 अप्रैल से लागू होंगे ये 12 बड़े बदलाव — टैक्स बचाने के लिए अभी से समझें नए नियम

वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत के साथ आयकर में कई महत्वपूर्ण बदलाव लागू होने जा रहे हैं। Income Tax Changes 2026 के तहत नया आयकर अधिनियम 2025 लागू होगा, विवरणी दाखिल करने की तिथियाँ बदलेंगी, स्रोत पर कर संग्रह की दरें बदलेंगी और शेयर पुनर्खरीद पर कर लगाने का तरीका बदलेगा।

1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले ये सभी बदलाव वित्त वर्ष 2026-27 से प्रभावी होंगे। हर करदाता को इन नए नियमों की जानकारी होना जरूरी है ताकि वह अपनी कर योजना सही से बना सके और अधिकतम कर बचत कर सके।

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बदलाव 1 — नया आयकर अधिनियम 2025 लागू होगा

सबसे बड़ा बदलाव यह है कि 1 अप्रैल 2026 से नया आयकर अधिनियम 2025 पुराने आयकर अधिनियम 1961 की जगह लेगा। नए अधिनियम में भाषा सरल की गई है, अनावश्यक प्रावधान हटाए गए हैं और कर अनुपालन को आसान बनाया गया है। इसका उद्देश्य करदाताओं और कर विभाग के बीच कानूनी विवादों को कम करना है।


बदलाव 2 — आयकर स्लैब में कोई बदलाव नहीं

अच्छी खबर यह है कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए आयकर स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

नई कर व्यवस्था के तहत स्लैब

₹4 लाख तक की आय पर कोई कर नहीं लगेगा। ₹4 लाख से ₹8 लाख तक 5% कर लगेगा। ₹8 लाख से ₹12 लाख तक 10% कर लगेगा। ₹12 लाख से ₹16 लाख तक 15% कर लगेगा। ₹16 लाख से ₹20 लाख तक 20% कर लगेगा। ₹20 लाख से ₹24 लाख तक 25% कर लगेगा। ₹24 लाख से अधिक आय पर 30% कर लगेगा।

धारा 87A के तहत ₹60,000 तक की कर छूट मिलने से नई कर व्यवस्था में ₹12 लाख तक की आय प्रभावी रूप से कर मुक्त रहेगी।


बदलाव 3 — “कर वर्ष” शब्द आएगा

नए आयकर अधिनियम 2025 में “वित्त वर्ष” और “निर्धारण वर्ष” की जगह अब “कर वर्ष” शब्द का उपयोग होगा। इससे करदाताओं के लिए समझना आसान होगा।


बदलाव 4 — आयकर विवरणी दाखिल करने की तिथि बदली

1 अप्रैल 2026 से ITR-3 और ITR-4 दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई से बढ़ाकर 31 अगस्त कर दी गई है। यह बदलाव उन करदाताओं के लिए है जिन पर कर लेखापरीक्षा यानी Tax Audit अनिवार्य नहीं है।

ITR-1 और ITR-2 की अंतिम तिथि 31 जुलाई ही रहेगी। कर लेखापरीक्षा की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर ही रहेगी।


बदलाव 5 — स्रोत पर कर संग्रह यानी TCS की नई दरें

1 अप्रैल 2026 से स्रोत पर कर संग्रह की दरों में बदलाव होगा।

मादक पेय पदार्थों की बिक्री पर TCS 1% से बढ़कर 2% हो जाएगी। तेंदू पत्ते की बिक्री पर TCS 5% से घटकर 2% हो जाएगी। रद्दी माल यानी Scrap की बिक्री पर TCS 1% से बढ़कर 2% हो जाएगी। कोयला, लिग्नाइट और लौह अयस्क जैसे खनिजों की बिक्री पर TCS 1% से बढ़कर 2% हो जाएगी। शिक्षा और चिकित्सा उपचार के लिए विदेश में धन भेजने पर TCS 5% से घटकर 2% हो जाएगी। विदेश यात्रा पैकेज पर TCS अब बिना किसी सीमा के एकसमान 2% होगी। पहले ₹10 लाख तक 5% और उससे अधिक पर 20% लगती थी।


बदलाव 6 — संशोधित विवरणी दाखिल करने की तिथि बढ़ी

पहले संशोधित विवरणी यानी Revised Return कर वर्ष समाप्त होने के 9 महीने के भीतर दाखिल करनी होती थी। अब यह अवधि बढ़ाकर 12 महीने यानी 31 मार्च तक कर दी गई है। हालांकि 31 दिसंबर के बाद संशोधित विवरणी दाखिल करने पर अतिरिक्त शुल्क देना होगा। विलंबित विवरणी की तिथि में कोई बदलाव नहीं हुआ है।


बदलाव 7 — प्रतिभूति लेनदेन कर यानी STT बढ़ा

वायदा एवं विकल्प यानी F&O कारोबारियों के लिए यह महत्वपूर्ण बदलाव है।

विकल्प बिक्री यानी Option Sale पर STT 0.1% से बढ़कर 0.15% हो जाएगा। आंतरिक मूल्य पर विकल्प की बिक्री पर STT 0.125% से बढ़कर 0.15% हो जाएगा। वायदा बिक्री यानी Futures Sale पर STT 0.02% से बढ़कर 0.05% हो जाएगा।

इससे F&O में कारोबार करने की लागत बढ़ेगी और छोटे कारोबारियों पर अधिक असर पड़ेगा।


बदलाव 8 — शेयर पुनर्खरीद पर कर का तरीका बदला

पहले कंपनियों द्वारा शेयर पुनर्खरीद यानी Buyback से प्राप्त राशि को लाभांश माना जाता था और लागू स्लैब दर पर कर लगता था। 1 अप्रैल 2026 से यह राशि पूंजीगत लाभ के रूप में कर योग्य होगी।

व्यक्तिगत प्रवर्तकों के लिए कर की प्रभावी दर 30% और कंपनी प्रवर्तकों के लिए 22% होगी।


बदलाव 9 — सार्वभौम स्वर्ण बॉन्ड पर पूंजीगत लाभ छूट सीमित हुई

अब सार्वभौम स्वर्ण बॉन्ड यानी Sovereign Gold Bond की परिपक्वता पर पूंजीगत लाभ छूट केवल उन्हीं निवेशकों को मिलेगी जिन्होंने बॉन्ड उसके प्रारंभिक निर्गम यानी Primary Market से खरीदे हों। द्वितीयक बाजार यानी Secondary Market से खरीदे गए बॉन्ड पर लाभ पूंजीगत लाभ के रूप में कर योग्य होगा।


बदलाव 10 — अनिवासी भारतीय से संपत्ति खरीद पर TDS आसान हुआ

अब कोई भी खरीदार किसी अनिवासी भारतीय यानी NRI से अचल संपत्ति खरीदने पर PAN आधारित चालान से TDS काट सकेगा। पहले इसके लिए TAN पंजीकरण लेना जरूरी था जो एक जटिल प्रक्रिया थी। इस बदलाव से NRI से संपत्ति खरीदने की प्रक्रिया सरल हो जाएगी।


बदलाव 11 — लाभांश पर ब्याज कटौती बंद होगी

पहले करदाता अपनी लाभांश आय के लिए किए गए ब्याज व्यय की कटौती ले सकते थे। 1 अप्रैल 2026 से लाभांश आय और म्यूचुअल फंड की इकाइयों से आय पर यह ब्याज कटौती बंद हो जाएगी। जो निवेशक उधार लेकर शेयरों में निवेश करते हैं उन पर इसका सीधा असर पड़ेगा।


बदलाव 12 — आयकर नियम मसौदा 2026 के प्रमुख प्रस्ताव

आयकर नियम मसौदा 2026 यदि पारित होता है तो 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। इसमें कई महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तावित हैं।

शिक्षा भत्ते की कटौती सीमा ₹100 प्रति माह से बढ़ाकर ₹3,000 प्रति माह प्रति बच्चा की जाएगी। छात्रावास भत्ते की सीमा ₹300 प्रति माह से बढ़ाकर ₹9,000 प्रति माह प्रति बच्चा की जाएगी। विभिन्न लेनदेन में PAN उद्धरण के लिए सीमा बढ़ाई जाएगी।


इन बदलावों का आप पर क्या असर होगा

नौकरीपेशा करदाता

आयकर स्लैब में कोई बदलाव नहीं हुआ इसलिए वेतनभोगी करदाताओं पर सीधा अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। ITR-1 की अंतिम तिथि 31 जुलाई ही रहेगी।

व्यापारी और स्व-रोजगार

ITR-3 और ITR-4 की अंतिम तिथि अब 31 अगस्त होगी जिससे अधिक समय मिलेगा। संशोधित विवरणी 31 मार्च तक दाखिल की जा सकेगी।

शेयर बाजार में निवेशक और कारोबारी

F&O कारोबारियों के लिए STT बढ़ने से लेनदेन लागत बढ़ेगी। Buyback से पूंजीगत लाभ के रूप में कर लगेगा। Secondary Market से SGB खरीदने वालों को अब छूट नहीं मिलेगी।

विदेश यात्रा करने वाले

विदेश यात्रा पैकेज पर TCS अब एकसमान 2% होगी जो ₹10 लाख से कम खर्च करने वालों के लिए पहले 5% थी। इससे उन्हें फायदा होगा।


अभी से करें कर योजना

इन सभी बदलावों को ध्यान में रखते हुए वित्त वर्ष 2026-27 की कर योजना अभी से बनाना जरूरी है।

नई और पुरानी कर व्यवस्था की तुलना करें और जो अधिक फायदेमंद हो उसे चुनें। निवेश और बचत से जुड़े निर्णय अप्रैल से पहले कर लें। F&O में कारोबार करते हैं तो बढ़ी हुई STT को अपनी लागत में शामिल करें। किसी अनुभवी कर सलाहकार से मार्गदर्शन लें।

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