आजकल बहुत से लोग पेट के निचले हिस्से या नाभि के पास सूजन और दर्द की शिकायत करते हैं, लेकिन उन्हें पता नहीं होता कि यह हर्निया रोग हो सकता है। हर्निया एक ऐसी बीमारी है जो पेट की मांसपेशियों के कमजोर होने से होती है और अगर समय पर इलाज न किया जाए तो यह गंभीर समस्या बन सकती है। इस आर्टिकल में हम आसान भाषा में समझेंगे कि हर्निया क्या है, इसके लक्षण क्या हैं और इलाज कैसे होता है।
हर्निया रोग क्या है – आसान भाषा में समझें
हर्निया तब होता है जब शरीर की मांसपेशी या ऊतक में छेद हो जाता है और उसके अंदर का अंग या हिस्सा बाहर की तरफ निकलने लगता है। इसे ऐसे समझें – जैसे किसी पुराने बैग में छेद हो जाए और उसके अंदर की चीजें बाहर निकलने लगें, वैसे ही पेट की दीवार में कमजोरी होने पर अंदर की आंत या चर्बी बाहर निकलने की कोशिश करती है। यह अक्सर पेट के निचले हिस्से, नाभि के पास या जांघ के क्षेत्र में होता है और दिखने में एक गोल उभार जैसा लगता है।
हर्निया के मुख्य लक्षण – कैसे पहचानें
हर्निया के सबसे पहला लक्षण है प्रभावित जगह पर एक उभार या सूजन दिखाई देना। यह उभार खड़े होने, खांसने या भारी सामान उठाने पर साफ दिखता है और लेटने पर कम हो जाता है। दर्द हमेशा नहीं होता, लेकिन कई बार उठने-बैठने, झुकने या वजन उठाने पर उस जगह पर खिंचाव या जलन महसूस होती है। कुछ मामलों में पेट में भारीपन, कब्ज की समस्या या उल्टी जैसा महसूस हो सकता है। अगर अचानक तेज दर्द हो और उभार सख्त हो जाए तो यह खतरनाक संकेत है – तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
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हर्निया रोग होने के मुख्य कारण
हर्निया कई कारणों से हो सकता है। भारी वजन उठाना, लगातार जोर लगाना या मेहनत का काम करना सबसे आम कारण है। कब्ज की समस्या में मल त्यागने के लिए जोर लगाने से भी पेट की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है। मोटापा भी एक बड़ा कारण है क्योंकि ज्यादा वजन से पेट की दीवार पर लगातार दबाव बना रहता है। गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को हर्निया होने का खतरा बढ़ जाता है। धूम्रपान करने से मांसपेशियां कमजोर होती हैं। बढ़ती उम्र में भी मांसपेशियां प्राकृतिक रूप से कमजोर हो जाती हैं। कभी-कभी जन्म से ही मांसपेशियों में कमजोरी होती है तो बच्चों को भी हर्निया हो सकता है।
हर्निया कितने प्रकार का होता है
इनगुइनल हर्निया सबसे आम प्रकार है जो लगभग 70-75 प्रतिशत मामलों में पाया जाता है। यह पेट के निचले हिस्से में होता है और पुरुषों को ज्यादा होता है। फेमोरल हर्निया जांघ के पास होता है और महिलाओं में अधिक देखने को मिलता है। अम्बिलिकल हर्निया नाभि के आसपास होता है जो छोटे बच्चों और मोटे लोगों में ज्यादा होता है। इनसिजनल हर्निया किसी पुरानी सर्जरी के निशान वाली जगह पर हो सकता है। हिटाल हर्निया पेट के ऊपरी हिस्से में होता है जहां खाने की नली पेट से जुड़ती है।
हर्निया का इलाज – सर्जरी ही एकमात्र रास्ता
हर्निया का इलाज मुख्य रूप से दो प्रकार की सर्जिकल प्रक्रियाओं से होता है – ओपन सर्जरी और लेप्रोस्कोपिक सर्जरी। छोटी दवाइयों से हर्निया ठीक नहीं होता, सिर्फ दर्द कम हो सकता है। ओपन सर्जरी में डॉक्टर चीरा लगाकर उभरे हुए हिस्से को वापस अंदर करते हैं और मांसपेशी के कमजोर हिस्से को मेश (जाली) से मजबूत बना देते हैं। लेप्रोस्कोपिक सर्जरी में बहुत छोटे कट से कैमरे की मदद से यही काम किया जाता है – इसमें दर्द कम होता है और जल्दी ठीक हो जाता है। ज्यादातर मामलों में मरीज 2-3 दिन में घर जा सकता है और 2-4 हफ्ते में पूरी तरह ठीक हो जाता है।
किन लोगों को हर्निया का ज्यादा खतरा है
कुछ लोगों को हर्निया होने का खतरा ज्यादा होता है। जिम में हैवी वेट लिफ्टिंग करने वाले, मजदूरी या भारी सामान उठाने का काम करने वाले लोगों को सावधान रहना चाहिए। 50 साल से ऊपर की उम्र के लोग, खासकर पुरुषों को इनगुइनल हर्निया का खतरा ज्यादा है। गर्भवती महिलाएं या जिन महिलाओं ने कई बार गर्भधारण किया हो। जिन्हें लगातार कब्ज की समस्या रहती है। मोटापे से ग्रस्त लोग। धूम्रपान करने वाले। पहले पेट की सर्जरी हो चुकी है तो उस जगह पर हर्निया होने का खतरा बढ़ जाता है।
हर्निया से बचाव के उपाय
हर्निया से बचने के लिए कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए। भारी वजन उठाने से बचें, अगर उठाना जरूरी है तो घुटने मोड़कर और धीरे-धीरे उठाएं। नियमित व्यायाम करें लेकिन पेट पर ज्यादा जोर वाली कसरत से बचें। खानपान सही रखें ताकि कब्ज न हो – फाइबर युक्त भोजन और पानी खूब पिएं। धूम्रपान छोड़ दें। वजन को नियंत्रित रखें। खांसी है तो तुरंत इलाज कराएं क्योंकि लगातार खांसने से भी हर्निया हो सकता है। अगर पहले से हर्निया है तो डॉक्टर की सलाह पर ही काम करें और समय पर इलाज कराएं।
Disclaimer: यह जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी के उद्देश्य से दी गई है। हर्निया के लक्षण दिखने पर तुरंत योग्य डॉक्टर से सलाह लें। यह आर्टिकल किसी भी तरह की चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है। बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी घरेलू उपचार या दवाई न लें।






